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18.02.18
बाजार नियामक सेबी ने फोर्टिस हेल्थकेयर में हुए घपले की जांच शुरू कर दी है। इस संबंध में कंपनी को 26 फरवरी तक जानकारी देने को कहा गया है। फोर्टिस हेल्थकेयर पर कुछ प्रमोटरों की कंपनियों में फंड ट्रांसफर में अनियमितता का आरोप है।


सेबी ने 16 फरवरी को फोर्टिस हेल्थकेयर से इस संबंध में जानकारी मांगी। कंपनी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि सेबी की ओर से मांगी गई जानकारी और दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। इन्हें तय समय पर बाजार नियामक के सुपुर्द कर दिया जाएगा। सेबी ने किसी जुर्माने या हर्जाने की बात नहीं कही है।

कुछ मीडिया रिपोर्टो में दावा किया गया था कि फोर्टिस हेल्थकेयर की पूर्णस्वामित्व वाली फोर्टिस हॉस्पिटल्स से करीब 500 करोड़ रुपये का फंड प्रमोटरों मालविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह की कंपनियों को दिया गया। इस लेनदेन में नियमों की अनदेखी की गई थी। इसके लिए बोर्ड की मंजूरी भी नहीं ली गई थी। इस पर कंपनी ने सफाई देते हुए बताया था कि फोर्टिस हॉस्पिटल्स ने 473 करोड़ की राशि प्रमोटरों की कुछ फर्मो में बतौर शॉर्ट टर्म इंवेस्टमेंट दी है। यह पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। तय किए गए प्रावधानों के तहत यह पैसा निश्चित समय पर वापस आ जाएगा। विवादों के बाद सिंह बंधु पद से इस्तीफा दे चुके हैं।


रेलिगेयर में तीन नए निदेशक
वित्तीय सेवा फर्म रेलिगेयर 1,200 करोड़ रुपये जुटाएगी। यह पूंजी इक्विटी और डेट के माध्यम से जुटाई जाएगी। इस राशि का प्रयोग पूंजी बढ़ाने और सब्सिडियरी कंपनियों में निवेश के लिए किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी ने तीन बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति की भी घोषणा की। फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रमोटर सिंह बंधु रेलिगेयर के निदेशक थे। आरोपों के बाद दोनों ने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा मालविंदर मोहन सिंह ने रेलिगेयर के सीईओ के पद से नवंबर में ही इस्तीफा दे दिया था। बैंकर विक्रम तलवार, रिजर्व बैंक के सेवानिवृत्त एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पी. विजय भास्कर और बे कैपिटल पार्टनर्स के संस्थापक सिद्धार्थ मेहता को बोर्ड में जगह दी गई है।

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